गेसूगंधा के फूल
अमूमन सब ने कभी ना कभी किसी ना किसी हसीन की सोहबत पाई होगी और अगर वह सोहबत दूसरे दर्जे पर पहुंची होगी तो जरूर उसकी गेसुओं से भी खेला होगा। दरअसल गेसुओं के पेंचो ख़म को सुलझाना सोहबत को तीसरे दर्जे पर ले जाने की सीढ़ी होती है। मैं जानता हूं आप सब में कुछ ऐसे भी होंगे जिनकी किस्मत के दरवाजे पर इतनी हसीन दस्तक नहीं हुई होगी, उनके लिए मेरी सहानुभूति और उज्जवल भविष्य की दुआएं है। अब उन तन्हाई के मारों के लिए ज्यादा भावुक ना होते हुए फिर से अपनी बात उन जुल्फों पर लाता हूं...इन हसीन लोगों के गेसुओं की बड़ी-बड़ी चर्चाएँ हुई हैं, कितने आशिक, शायर तो इन्हीं पेंचो ख़म में उलझ गए और भटक के मर गए। खुदा-ए-सुखन मीर तक़ी मीर साहब ने कहा है कि-
हम हुए तुम हुए कि मीर हुए
सब तेरी जुल्फ के असीर हुए
बात यह है कि इन्ही ज़ुल्फ़ों के ख़मों को सुलझाते वक्त कभी ना कभी एक खुशबू से आपका राब्ता भी हुआ होगा। उस खुशबू की खूबी यह है कि वैसी कोई दूसरी खुशबू नहीं है इस पूरी कायनात में। हालांकि इसकी प्रमाणिकता किसी खुशबू फ़रोश के पास भी नहीं है लेकिन ये ख़ुशबू इकलौती होती है इस जहां में। दरअसल यह जुल्फ, गेसू, बाल.. यह सब नाम तो हमने दिए हैं इसे, भगवान ने तो इसे एक फूल बनाया है.. ‘गेसूगंधा के फूल’.. जिसकी खुशबू पाने के लिए प्रेम एक अनिवार्य शर्त है, और इस शर्त को पूरा करने के बाद इस दैवीय या पारलौकिक खुशबू से आप हमेशा महकते रहते हैं। यकीन नहीं होता? आजमाइश करके देख लीजिए......
मैं नहीं जानता हूं कि इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद कितने लोग फिर से किसी हसीन की जुल्फों के ख़मों को सुलझाएँगे या उन घटाओं की छांव में आराम करेंगे या गेसूगंधा के फूलों की खुशबू से बेहोश होंगे....पर अगर किसी एक के साथ भी ऐसा हुआ तो मुझे इस ब्लॉग का मेहनताना मिल जाएगा...
इसे झेलने के लिए आपका आभार 🙏🏻🙏🏻
- सौरभ श्रीवास्तव
हम हुए तुम हुए कि मीर हुए
सब तेरी जुल्फ के असीर हुए
बात यह है कि इन्ही ज़ुल्फ़ों के ख़मों को सुलझाते वक्त कभी ना कभी एक खुशबू से आपका राब्ता भी हुआ होगा। उस खुशबू की खूबी यह है कि वैसी कोई दूसरी खुशबू नहीं है इस पूरी कायनात में। हालांकि इसकी प्रमाणिकता किसी खुशबू फ़रोश के पास भी नहीं है लेकिन ये ख़ुशबू इकलौती होती है इस जहां में। दरअसल यह जुल्फ, गेसू, बाल.. यह सब नाम तो हमने दिए हैं इसे, भगवान ने तो इसे एक फूल बनाया है.. ‘गेसूगंधा के फूल’.. जिसकी खुशबू पाने के लिए प्रेम एक अनिवार्य शर्त है, और इस शर्त को पूरा करने के बाद इस दैवीय या पारलौकिक खुशबू से आप हमेशा महकते रहते हैं। यकीन नहीं होता? आजमाइश करके देख लीजिए......
मैं नहीं जानता हूं कि इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद कितने लोग फिर से किसी हसीन की जुल्फों के ख़मों को सुलझाएँगे या उन घटाओं की छांव में आराम करेंगे या गेसूगंधा के फूलों की खुशबू से बेहोश होंगे....पर अगर किसी एक के साथ भी ऐसा हुआ तो मुझे इस ब्लॉग का मेहनताना मिल जाएगा...
इसे झेलने के लिए आपका आभार 🙏🏻🙏🏻
- सौरभ श्रीवास्तव
बहुत उम्दा लेख सर
ReplyDeleteas always... beautiful writing
ReplyDeleteअति उत्तम
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